Friday, January 25, 2019

भारत में लॉन्च से पहले Honor View 20 की कीमत लीक

Honor View 20 भारत में 29 जनवरी को लॉन्च हो रहा है. हाल ही में इसे फ्रांस में इसे ग्लोबल लॉन्च किया गया है. फोन की कुछ बातें हैं जो इसे अलग बनाती हैं. इनमें पंचहोल डिस्प्ले और 48 मेगापिक्सल कैमरे जैसे फीचर्स शामिल हैं. भारत में ये स्मार्टफोन सिर्फ Amazon की वेबसाइट पर मिलेगा. लॉन्च से पहले इसकी कीमतें लीक हो गई हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, Honor View 20 की कीमत भारत में 35,999 रुपये से शुरू होगी. ये कोई नई बात नहीं है, क्योंकि इससे पहले भी हमने यही उम्मीद की थी. हालांकि ये बेस वेरिएंट के लिए है जिसमें 6GB रैम के साथ 128GB की इंटर्नल स्टोरेज दी गई है. दूसरे वेरिएंट में 8GB रैम के साथ 128GB इंटर्नल मेमोरी दी गई है इसकी कीमत लीक नहीं हुई है. ये स्मार्टफोन जाहिर One Plus 6T से टक्कर लेगा. क्योंकि भारत में OnePlus 6T 37,999 रुपये में मिलता है.

गौरतलब है कि Honor View 20 पहले स्मार्टफोन्स में से है जिनमें पंचहोल डिस्प्ले दी गई है. इतना ही नहीं जब ये स्मार्टफोन चीन में पेश किया गया तब कोई भी स्मार्टफोन ऐसा नहीं था जिसमें 48 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया हो. अब कई स्मार्टफोन्स आ गए हैं जिनमें 48 मेगापिक्सल का कैमरा है. या यों कहें कि एक ट्रेंड शुरू हो चुका है जिनमें में 48 मेगापिक्सल रियर कैमरे वाले स्मार्टफोन लॉन्च किए जा रहे हैं.

Honor View 20 का डिजाइन ग्लास मेटल का बै और रियर  में V शेप्ड पैटर्न दिया गया है. ग्रेडिएंट कल स्कीम है – मिडनाइट ब्लैक और ब्लू सफायर. रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में ये दोनों कलर वेरिएंट्स लॉन्च किए जाएंगे. कंपनी द्वारा लॉन्च के लिए मीडिया इन्वाइट्स भेजे जा चुके हैं और इसे गुरूग्राम में 29 जनवरी को लॉन्च किया जा रहा है.

Honor View 20 में 6.4 इंच की फुल एचडी टीएफटी डिस्प्ले दी गई है जिसका ऐस्पेक्ट रेश्यो 19.5:9 है और स्क्रीन टु बॉडी रेश्यो 91.8% है. इसकी बैटरी 4,000mAh की है कंपनी के मुताबिक इसमें सुपर फास्ट चार्जिंग सपोर्ट है. इसमें ऑक्टा कोर Kirin 980 प्रोसेसर लगया गया है और कंपनी ने दावा किया है कि ऐडवांस्ड AI और मशीन लर्निंग कंप्यूटेशन के लिए डुअल NPU दिया गया है.

इस स्मार्टफोन में यूएसबी टाइप सी पोर्ट के साथ 3.5mm हेडफोन जैक दिया गया है. फोटॉग्रफी के लिए इस स्मार्टफोन में 48 मेगापिक्सल का SONY IMX586 CMOS दिय गया है. पिक्सल बाइनिंग टेक का यूज करके चार 0.8 माइक्रॉन पिक्सल को मर्ज करके एक बड़ा 1.6 माइक्रॉन पिक्सल जेनेरेट किया जाता है. इसके लिए 12 मेगापिक्सल मोड में यूज करना होगा. दूसरे कौमरे के तौर पर ToF दिया गया है. सेल्फी के लिए इसमें 25 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है.

सबसे ज्यादा फिल्म में किसी चीज पर फोकस किया गया है तो वो है कंगना के लुक्स. उनकी फिल्म में एंट्री से लेकर और खत्म होने तक कंगना गजब की खूबसूरत लगती हैं. डैनी डेन्जोंगपा और मोहम्मद जीसान अयूब ने गजब की अदाकारी की है. फिल्म के संवाद देशभक्ति के जज्बे भरे हैं और डायलॉग भी अच्छे हैं. फिल्म के सेट्स पर काफी काम किया गया है. डायेरक्शन के लिहाज से कंगना ने बेहतरीन काम किया है.

क्यों ना देखें

फिल्म की लेंथ बहुत बड़ी है. इसके कारण कई बार ध्यान भटकाव सा भी महसूस हो सकता है. वहीं फिल्म में डायलॉग तो कई हैं लेकिन उनमें पंच नहीं है.  बनावटी से भी लगते हैं. फिल्म के सेकंड हाफ में जबरदस्ती का फन एलिमेंट लाने की कोशिश की गई है, जो कि अखरता है. वहीं कंगना में जोश तो भरपूर मात्रा में दिखा है लेकिन उनकी आवाज में फर्क साफ दिख रहा था. तकनीक के इस्तेमाल के बावजूद फिल्म में उनकी आवाज में दो तरह का अंतर नजर आता है. अंकिता लोखंडे भी अपनी डेब्यू फिल्म में खास कमाल नहीं दिखा पाई. फिल्म में उनकी मौजूदगी कम रही. ऐसा भी लगता है कि अंकिता छोटे पर्दे वाले फ्रेम से अभी निकल नहीं पाई हैं.

Thursday, January 17, 2019

अमित शाह को स्वाइन फ्लू, BJP के चुनावी अभियान पर कितना पड़ेगा असर

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अध्यक्ष अमित शाह को स्वाइन फ्लू होने के बाद दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया गया है. उन्होंने स्वयं अपनी सेहत की जानकारी देते हुए ट्वीट किया कि उन्हें स्वाइन फ्लू हुआ है, जिसका उपचार चल रहा है और वे जल्द ही स्वस्थ्य होकर लौटेंगे. बेहद सक्रिय रहने वाले बीजेपी अध्यक्ष के बीमार पड़ने का असर उनके नेतृत्व में होने वाले पार्टी के हालिया कार्यक्रमों पर पड़ सकता है.

बंगाल में 5 रैलियां करने वाले थे शाह

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बीमार होने का सबसे बड़ा असर पश्चिम बंगाल में 20 जनवरी से शुरू होने वाले पार्टी के अभियान पर पड़ सकता है. सुप्रीम कोर्ट से राज्य में रथयात्रा निकालने की मंजूरी नहीं मिलने के बाद बीजेपी की प्रदेश इकाई ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की 5 रैलियों का खाका तैयार किया है. जिसमें पहली जनसभा मालदा जिले में 20 जनवरी को होनी थी. इसके बाद 21 जनवरी को 2 रैलियां बीरभूम और पश्चिम मिदनापुर में होनी थीं. वहीं 22 जनवरी को 2 अन्य जनसभाएं दक्षिण 24 परगना और नादिया जिले में तय थी. इसके अलावा 8 फरवरी को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी जनसभा की योजना भी बनाई गई है. जिसे लेकर तैयारियां जोरों पर चल रही हैं. ऐसे में अपने कप्तान के बिना बीजेपी की बंगाल इकाई के मनोबल पर इसका सीधा असर पड़ सकता है.  

कर्नाटक में क्या होगा?

दूसरी तरफ, कर्नाटक के 104 बीजेपी विधायक पूर्व मुख्यमंत्री येदियूरप्पा के साथ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के नजदीक गुरुग्राम के एक होटल में कैंप किए हुए हैं और येदियूरप्पा की तरफ से लगातार पार्टी हाईकमान से मुलाकात का समय मांगा जा रहा था. माना जा रहा था कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह कर्नाटक के पार्टी विधायकों से जल्द मुलाकात भी करने वाले थे. लिहाजा शाह की गैरमौजूदगी में बीजेपी का कर्नाटक प्लान भी खटाई में पड़ सकता है.

बीजेपी करने वाली है 50 से ज्यादा प्रेस कॉन्फ्रेंस

आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी के चुनावी घोषणापत्र के लिए बैंठकें भी शुरू कर दी हैं. इसके साथ ही वे लगातार विभिन्न राज्यों में शक्ति केंद्र के कार्यकर्ताओं, पन्ना प्रमुखों और प्रबुद्धजनों के साथ सम्मेलन भी कर रहे थे. केंद्र की मोदी सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों को जनता तक पहुचाने के लिए बीजेपी ने अगले चार दिनों में देश के 70 अलग-अलग जगहों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की योजना बनाई है. इन प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए पार्टी पीएम मोदी और अध्यक्ष अमित शाह का संदेश आम लोगों तक पहुंचाना चाहती है.

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ सांसदों को शामिल होना है. इसी क्रम में स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा बुधवार को लखनऊ में थे, लेकिन शाह के बीमार होने की खबर मिलते ही वह फौरन दिल्ली के लिए रवाना हुए और एम्स पहुंच गए. ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि पार्टी के इन वृहद कार्यक्रमों पर हाईकमान के बीमार होने का कितना असर पड़ सकता है.

शिवराज, वसुंधरा, रमन को बनाया गया था उपाध्यक्ष

हाल ही में दिल्ली में हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अधिवेशन में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी पदाधिकारियों को जीत का मंत्र दिया. इस दो दिवसीय कार्यक्रम में कई नेताओं को पार्टी की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई. इससे ठीक पहले मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव हार चुके पू्र्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, वसुंधरा राजे और रमन सिंह को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया. अब शाह के अचानक बीमार पड़ने से इन सभी बड़े नेताओं की जिम्मेदारी तो बढ़ेगी ही साथ ही उनका ध्यान आम चुनाव की रणनीति से संबंधित कार्यों के अलावा पार्टी अध्यक्ष के स्वास्थ्य की ओर चले जाना भी लाजमी है.

Tuesday, January 1, 2019

क्या साल 2019 में आएगा राम मंदिर मामले पर फैसला?

अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़ा केस अदालत में 1950 में चल रहा है. किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए सात दशक बहुत लंबा समय होता है. 70 साल में पीढ़ियां बदल जाती हैं, लोग बदल जाते हैं और तो और देश की सियासत बदल जाती हैं. देशों का दोबारा निर्माण हो जाता है, लेकिन इस विवाद का कोई हल नहीं निकल सका है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व में तीन नए जजों की बेंच इस मामले पर 4 जनवरी को सुनवाई करेगा. ऐसे में क्या सालों पुराने इस मामले का फैसला 2019 में आएगा या फिर अभी और इंतजार करना पड़ेगा?

बता दें कि अयोध्या राम मंदिर-बाबरी मस्जिद की जमीन के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद पर लंबे समय के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने 30 सितंबर, 2010 में फैसला दिया था. हाई कोर्ट ने विवादित भूमि को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया था. कोर्ट ने तीनों पक्षों रामलला, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड में 2.77 एकड़ जमीन को बराबर बांटने का आदेश दिया था.

हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हिंदू महासभा और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी. इसके बाद से अयोध्या राम मंदिर-बाबरी मस्जिद जमीन के मालिकाना हक का मुकदमा सुप्रीम कोर्ट में अटका हुआ है. हालांकि इस साल दशकों पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा.

अयोध्या विवाद को सुलझाने के लिए नेताओं से लेकर अदालतों तक बहुत सी कोशिशें की जा चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है. ऐसे में सारी उम्मीदें सुप्रीम कोर्ट से लगी हैं. कोर्ट इस मामले में सुनवाई कब होगी, इस पर 4 जनवरी को फैसला करेगा. हालांकि इस मामले के फैसले के लिए चारो ओर से आवाज उठ रही है.

दरअसल, ऐसा माना जाता है कि साल 1528 में अयोध्या में एक ऐसी जगह पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया, जिसे हिंदू भगवान राम का जन्मस्थान मानते हैं. कहा जाता है कि विवादित जगह पर मस्जिद मुगल बादशाह बाबर के समय में उसके सेनापति मीर बाकी ने बनवाई थी. इस लिहाज से 500 साल पुराना मामला पहली बार आजादी के बाद 1950 में अदालत पहुंचा. इसके बाद से अभी तक फैसले का महज इंतजार हो रहा है. ऐसे में अब मामला देश की सबसे बड़ी अदालत में है और सुनवाई की तारीख भी नए साल के साथ दस्तक दे रही है.

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