वित्तमंत्री अरुण जेटली का दावा है कि नौकरियां घटने के आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा- मोदी सरकार की तीन बड़ी उपलब्धियां हैं, पहली- सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था। दूसरी- ईमानदार सरकार। तीसरी- बिना किसी आंदोलन के सरकार चलना। आज ट्रेड यूनियन भी हड़ताल करवाती है तो लोग उसमें शामिल नहीं होते। क्योंकि लोगों को अच्छी सुविधाएं और साधन मिल रहे हैं। पढ़िए जेटली से भास्कर के संपादक आनंद पांडे की बातचीत के प्रमुख अंश...
सवाल : रोजगार बड़ा मुद्दा है। एनएसएसओ रिपोर्ट कह रही है कि बेरोजगारी दर 45 साल में सबसे ज्यादा है।
जवाब : एनएसएसओ की रिपोर्ट आई ही नहीं है। उसके कुछ अंश हैं। इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर करने वाले जो 108 अर्थशास्त्री थे, वो राजनीतिज्ञ ज्यादा थे। आप तथ्यों पर आइए। अगर 17 करोड़ लोगों ने मुद्रा स्कीम में लोन लिया, 10 हजार किमी हाईवे हर साल बन रहे हैं, अर्थव्यवस्था सबसे तेज है तो क्या यह सब बिना जॉब क्रिएशन के हो रहा है? जमीनी हकीकत देखिए। राजनीति उस पर चलती है, मोटीवेटेड बयानों पर नहीं।
सवाल : तो आपका मतलब है कि रोजगार मुद्दा नहीं है?
जवाब : ये जो डेटा क्वेश्चन होता है न...कौन डेटा इकट्ठा कर रहा है? उसका स्लांट क्या है? आप किसी किसान परिवार के तीन भाइयों से पूछेंगे कि क्या आपके पास रोजगार है तो वो कहेंगे नहीं है। पर जब उनसे पूछेंगे कि जीने के तमाम साधन हैं तो वे कहेंगे हां। दोनों सवालों का डेटा अलग-अलग होगा।
सवाल : रघुराम राजन ने कहा है कि जीडीपी ग्रोथ 7% नहीं हो सकती, क्योंकि रोजगार पैदा नहीं हुए।
जवाब : हमारी सरकार का डेटा ऑथेंटिक है। इसे आईएमएफ भी मानता है, जो मदर ऑफ ऑल डेटा है। कुछ लोगों के अपने-अपने व्यक्तिगत मोटिव्स हो सकते हैं।
सवाल : कांग्रेस को भरोसा है कि उसकी न्यूनतम आय वाली स्कीम गेम चेंजर साबित होने जा रही है।
जवाब : वो है न- दिल खुश करने के लिए गालिब ये ख्याल अच्छा है। नेहरू-गांधी परिवार ने गरीबी के नाम पर सिर्फ राजनीति की है। गरीबी हटाने के लिए असल में मोदी सरकार ने ही काम किया है। मैं इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस के लिए तैयार हूं। कांग्रेस ने राज्यों में किसानों को कर्जमाफी का वादा किया, लेकिन निभाया नहीं। हमने गरीब को साधन दिए हैं।
सवाल : विपक्ष का आरोप है कि पीएम प्रचार मंत्री हो गए हैं। सेना या डीआरडीओ कुछ करे तो पीएम बताते हैं?
जवाब : ये लोग (विपक्ष) मोदी जी के सामने बौने हैं। सर्जिकल स्ट्राइक की ब्रीफिंग आर्मी और एयर स्ट्राइक की ब्रीफिंग विदेश सचिव ने की थी। पीएम ने (ए-सैट) का अनाउंसमेंट किया, क्योंकि इसमें देश का बहुत बड़ा राजनीतिक और डिप्लोमेटिक एफर्ट था कि हम दुनिया को बताएं कि अब भारत की ओर मत देखो। यह ऐलान ज्वाइंट सेक्रेटरी नहीं कर सकता था।
सवाल : एक रिपोर्ट है, जिसके मुताबिक जिस देश में जीएसटी लागू हुआ वहां सरकार चुनाव हार गई।
जवाब : यह वैज्ञानिक तर्क नहीं है। जीएसटी वो तंत्र है, जिसने हिंदुस्तान के डेढ़ साल में 20% इनडायरेक्ट टैक्स कम किए। 90% व्यापारियों को जीएसटी से मुक्त कर दिया।
राजनीतिक पंडित गलत साबित होंगे, क्योंकि वोट गणित नहीं कैमिस्ट्री पर पड़ते हैं |
सवाल : मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और यूपी में भाजपा चोटी पर है। निश्चित तौर पर सीटें कम होनी हैं। उस नुकसान की भरपाई कहां से होगी?
जवाब : 2014 ने आप जैसे पॉलिटिकल पंडितों को गलत साबित किया था। इस बार उससे ज्यादा गलत साबित करेंगे। पूरा पूर्वोत्तर, पूरा बंगाल, पूरा ओडिशा बदलाव करने जा रहा है। दक्षिण में भी हमारे गठबंधन हुए हैं, वहां देखिए जमीनी हालात कितने अलग हैं।
सवाल : मतलब यह कि हिंदी पट्टी के राज्यों का नुकसान इन राज्यों से पूरा हो जाएगा?
जवाब : देखिए, आप गणित में जा रहे हैं। पूरा हिंदुस्तान बदल गया है। हमारे यहां वोट केमेस्ट्री पर पड़ता है, गणित पर नहीं। पिछली बार हमें किसी ने 220 से ज्यादा सीटें नहीं दी थीं। क्योंकि आप लोग गणित लगाते हैं, जबकि मैं कहता हूं कि गणित नहीं केमेस्ट्री देखिए।
सवाल : रफाल मुद्दे पर बार-बार गफलत क्यों हो रही है? पहले सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि गलत हलफनामा दे दिया है। फिर दस्तावेज चोरी की बात कही, फिर उससे सरकार पलट गई। क्यों?
जवाब : वो सरकार की गलती नहीं थी...मीडिया की समझ में गलती थी। सरकार ने कोई गलत हलफनामा नहीं दिया। जजमेंट में कोई टायपोग्राफिकल एरर हो गया तो सरकार ने कहा- इसे सही कर लो। जब कोई तर्क नहीं बचा तो कहा जाने लगा कि सरकार ने गलत हलफनामा दिया था। एटॉर्नी जनरल ने कोर्ट में कहा कि फाइल से फोटो कॉपी लेकर आ गए। कानून की भाषा में इसे स्टोलन डाॅक्यू्मेंट्स ही कहते हैं। अब हमारा मीडिया इतना महारथी है कि उसने कहा कि फाइल गायब हो गई। क्योंकि, ब्रेकिंग न्यूज की परपंरा के बाद न्यूज का ही ब्रेक डाउन हो गया है।
सवाल : जेपीसी जांच की मांग क्यों ठुकरा दी?
जवाब : जेपीसी पॉलिटिकल बॉडी है। वो पॉलिसी इश्यूज में जा सकती है। सिक्योरिटी से जुड़े मुद्दे में ऐसा नहीं हो सकता। यह मामला तो सीएजी ने भी देख लिया, सुप्रीम कोर्ट ने भी देख लिया। विपक्ष दोनों जगह पिट गया तो कहने लगा कि अब पॉलिटिशियन से एप्रूव करवाओ।
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